ईरान में यहूदियों की आबादी तकरीबन तकरीबन हजारों में है।
ईरान में ईसाइयों की आबादी लगभग लाखों में है..!
ईरान में हिंदूओंकी आबादी भी ज्यादा संख्या में है।
ईरान और अमेरिका - इज़राइल के इस गंभीर और वैश्विक युद्ध के चलते इराणी मिडिया ने उसे ना मुस्लिम - यहुदी ना मुस्लिम - इसाई ना मुस्लिम - हिंदू रंग दिया ना ऐसी खबरों को त्ओज्जो दिया, ना बढावा दिया।
और तो और वहां ना किसी यहूदी की मॉब लिंचिंग हुई, ना किसी इसाई की ना किसी हिन्दू की हत्या हुई, ना ईरानियों ने किसी से अपने देश, अपने मज़हबी नारे लगवाये ना कोई गीत भी गला दबाकर लाठी डंडे या किसी हथियार के ज़ोर पर गवाया.!
ना "अल्लाह हू अकबर" कहलवाया और ना मारा पीटा...!
ना ऐसी कोई खबर मिडिया पे ना सोशल मीडिया पे आई या किसी हवाले से सामने आई,
ओ बात अलग है की इस युद्ध जन्य हालात मे इजराईल मे अपने नोकरी के वजह फसे या यूँ कहे निवासी भारतीय मुल के लोगों को इजरायली नागरिकोने किस हीनता से दितकारा और उने अपमानित किया ऐसे अनेको व्हिडिओ जो सोशल मीडिया पर मौजूद है उसिका एक उदाहरण ये भी है की हालही में भारतीय मिडिया TV9 के रिपोर्टरको इजरायली नागरिक ने जिस प्रकार से इजराईल मे अपमानित किया गया, जिसका व्हिडिओ जो खुद उस मिडिया चॅनल दिखाई दिया और ओ व्हिडिओ सोशल मीडिया पे खूब व्हायरल भी हुआ..!
उस रिपोर्टर के व्हिडिओ मे साफ सुनाई दिया की ओ वहा भी देश के मुस्लिम नागरिक को निचा दिखानेकी कोशिश मे लगा पडा था जो उसकी और उसके मिडिया कंपनीकी मानसिकता को उजागर कर रही थी...
अब ये सवाल देश की जनता का है क्या यह देश के मुख्य प्रवाह की मीडिया की पत्रकारीता है..?
इसे दुनिया मे किस तरीके से समजा गया होगा..?
क्या हमारे "भारत" देश की देश के पत्रकारोंकी यह संस्कृती कभी रही थी..?
अब सवाल सत्ता के नशे मे चूर कुछ
देशभक्ती से परे चंद नफरती देशद्रोही बेअक्कल अंधभक्त और दीन रात हिंदू मुस्लिम कर झूठ,नफरत बेचने की मंडी सजाई हिंसा को बढावा दे रही जाहिल गोदी मीडिया हाऊसेस के लिये ,
क्या आप देश को जलील कर गुलाम बनाने की दिशा मे देश के नागरिकोंको आपसी नफरतसे लिप्त बनाने की होड मे चंद रुपयोकीं खातिर् दीन रात हिंदू मुस्लिम कर सत्ता को खुश करने के चक्कर मे, देश की छबी को पुरी दुनिया मे मलिन नहीं कर रहे..?
जिसे आज दुनिया चिन्हीत भी कर रही है, कुदरत कई वाकियोंसे और नजारोंसे सीखाता है , क्या सीख मिली इराण युद्ध से..?
बहेराल बात इराण की हो रही है..!
दुश्मन देश अमेरिका इजरायल ने महिलाओंके हक्क अधिकारोंकी आड से लेकर आये दीन एक नये झूठ का सहारा ले धोकेसे देश के निहत्ते बुजुर्ग सुप्रीम लीडर के साथ निर्दोष मासूम स्कूली बच्छोंके नरसंहार से सुरु युद्ध थोपके देश की रिजीम चेंज करने की कोशिश करता रहा, करता रहा,
बावजूद हकीकत कुछ और ही बयांन कर गई कर रही जिसे दुनिया ने देखा भी और समजा भी और आज दुनिया में समजभी रहे हैं समजा भी रहे हैं तो इराण मे इराणने अपने किसी नागरिक से या वहा काम कर रहे किसी से देशभक्ति का सबूत मांगा गया, ना किसी को गद्दार कहा गया, ना यहूदियों से उनके धर्मगाह वतन इज़राइल जाने को कहा ना ईसाईयों को अमेरिका ना हिंदुओं को नेपाल निकल जाने को कहा...!
तेहरान में स्थित यहूदी धर्म स्थल "रफी निया सिनेगॉग" जो हालही यहुदी शासित "इज़राइल" के ही हमले में क्षतिग्रस्त हुआ जो यहूदियों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक केंद्र था।
स्थानीय यहुदीओने इजराईल के इस करतूत का विरोध भी जताया,
इसी बीच बहुसंख्य इराणियों ने आपसी भाईचारेको दर्शाते 'जो किसी भी देश के भविष्य के लिये देश की असल निंव होती हैं, इसको जगाते हुए ईरान के बडी तादाद मे लोग यहूदियों की मदद के लिए वहां पहुंचे, उनकी आस्था की कदर करते हुए उने उनके धार्मिक स्थल को पुनः निर्माण करने का उनसे वादा किया, किसी ने उनको "वर्दी का खोफ" नहीं दिखाया, ना किसी ने कहा कि इसके नीचे हमारे इमाम पूर्वजोंकी कब्र है।
या यहाँ हमारी मस्जिद थी या होगी..!
ईरान में हिंदू मंदिर भी हैं, जैसे कि बंदर अब्बास में विष्णु मंदिर और "तेहरान" में श्री वेंकटेश्वर मंदिर, मगर आज भी किसी ईरानीने इनके ऊपर चड अपना नंगा नाच करते, खुले हाथीयार लहराते हुए अपना धार्मिक झंडा नहीं लहराया, ना डीजे बजवाया ना गाना गाया, ना गवाया..!
इराण के नागरिकोने पुरी दुनिया को फिर सीखाया देश नफरत से नहीं आपसी भाईचारे से सुपर पॉवर बनता है..
और
"इसी का नाम ईनसानियत हैं यह मंत्र दिया..!
हमारा मक्सद देश के छबी को साफ रखना और देश के हर धर्म सिद्धांतो का आदर सन्मान कर आपसी भाईचारे को बढावा देना है..!